शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

प्रेमिकाएँ जामुन हैँ

प्रेमिकाएं जामुन हैँ

खट्टी मीठी

चिकनी

सुन्दर

आकर्षक

गूदेदार

स्वादिष्ट

कालीघटा वाली

गुठलीदार

इसे नमक के साथ खाइए

पूरा आनन्द पाइए

कुछ लोग इसे बिना

नमक के

खाते हैँ

उन सब के मुँह

बकठाते हैँ

जामुन का रंग पक्का
बिल्कुल पक्का
इन्द्रधनुषी
मिटाए मिटता नहीँ
छुटाए छुटता नहीँ

आप कहीँ से भी

जामुन खाकर आइए

चाहे जितना छिपाइए

पता चल जाएगा

ऐसे मेँ कोई

भला आदमी किस तरीके

से घर के बाहर

जामुन खाएगा

जामुन के शौकीन
इसे मेले से
ठेले से
बाजार से
सडक से
खरीद कर लाते हैँ
फिर इसे इत्मीनान से खाते हैँ

जो बेहद शौकीन हैँ

वह इसे पेड पर चढकर

खाते हैँ

कभी कभी जामुन खाने

के चक्कर मेँ

हाथ पाँव भी

टूट जाते जाते हैँ

मामला तब रोचक

हो जाता है

जब जामुन के स्वाद मे

खोए हुए लोग

स्वयँ भी जामुन के साथ
टूट जाते हैँ

और गिरते समय

प्राण भी छूट जाते हैँ ।
पेड

5 टिप्‍पणियां:

अरुण मिश्रा ने कहा…

वाह, मजा आ गया
क्या बात है!

Yogendra's Blog ने कहा…

वाह दादा वाकई कविता बहुत ही मजेदार है कितनी प्रशंसा की जाए
बहुत बहुत साथुवाद

बेनामी ने कहा…

क्यों ना अपने ही घर में जामुन का पेड़ लगाया जाये,
और उसी पेड़ पर चढ़कर खूब जामुन खाया जाये ,

जब जब आदमी दूसरो के जामुन पर ललचाया है
तब तब हाथ पैर सलामत नहीं पाया है |

रंग निरोधक जबान पर चढ़ा कर जाइए
अनचाहे दाग धब्बो से छुटकारा पाइए |

anshu ने कहा…

dada jaamun bahut gazab ke lage hai, muh me paani aa gaya..............

बेनामी ने कहा…

ऐसी फूहड़ और छिछोरी तुकबंदी को आप कविता कहते हैं? शर्म आती है की जिस देश में कभी पोवाडे आदि गाये जाते थे वह देश आज इतने नीचे गिर गया है! If we do not change our ways, our nation will soon become of eunuchs and concubines.