गुरुवार, 2 सितंबर 2010

घनश्याम ; एक छंद

छंद में भगवान कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम की अभिव्यक्ति है । अप्रैल 1998 ।

घनश्याम के अंक

लगी लगी मैं

कर पल्लव बेनु

बनी हुई हूँ ।

चिर साधिका हूँ

मनमोहन की

रति रंग की धेनु

बनी हुई हूँ ।

सखि ! नेह की डोर से

हूँ बँधी मैं

मनमोहन रूप

सनी हुई हूँ ।

स्वर , रश्मियों में

उन्मत्त हूँ मैं

पद पंकज रेनु

बनी हुई हूँ ।

35 टिप्‍पणियां:

A ने कहा…

Excellent as usual..read earlier ones too.

Vishnukant Mishra ने कहा…

prem prakrti ka roop hai aadha,
jb tk krisn rang rage na radha.

waaah arunesh ji lage raho.....

Arvind Mishra ने कहा…

समर्पण की की उदात्त अभिव्यक्ति

Majaal ने कहा…

पद पंकज रेनु
बनी हुई हूँ ।
सुन्दर अभिव्यक्ति .
comments का रंग भी अगर सफ़ेद हो जाये, तो पड़ने में अधिक सुविधा होगी.

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बहुत सुन्दर !

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

khubshurat.........:)

arvind ने कहा…

चिर साधिका हूँ

मनमोहन की

रति रंग की धेनु

बनी हुई हूँ ।
...bahut sundar kavita.

nilesh mathur ने कहा…

बहुत उच्च स्तर की रचना!

Divya ने कहा…

स्वर , रश्मियों में

उन्मत्त हूँ मैं

पद पंकज रेनु

बनी हुई हूँ ।

Lovely lines !

Virendra Singh Chauhan ने कहा…

सर ...इस कविता को पढ़वाने के लिए आपका आभार
इसे पढ़कर मन कृष्णमय हो गया.
आप व् आपके परिवार वालों को श्री कृष्ण जन्मास्टमी की शुभकामनाएँ......

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

प्रेम की पराकाष्ठा और एकाकार होने का भाव,हृदय को पुलकित करने वाली रचना!!

anupama's sukrity ! ने कहा…

कृष्ण रंग में रंगी -
बहुत सुंदर कविता-
शुभकामनायें .

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति...सुंदर रचना!

बेचैन आत्मा ने कहा…

..बहुत सुंदर।
..जै श्री कृष्ण।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सुन्दर!!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीय अरुणेश मिश्र जी

स्वर , रश्मियों में
उन्मत्त हूं मैं
पद पंकज रेनु
बनी हुई हूं ।


बहुत भाव पूर्ण सुंदर काव्य रचना है ।
बहुत बहुत बधाई !
शुभकामनाएं !!

- राजेन्द्र स्वर्णकार

मनोज कुमार ने कहा…

प्रेम की पवनता को दर्शाती आपकी प्रस्तुति का जवाब नहीं!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर भाव समर्पण के।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत पवित्र रचना ...

शोभना चौरे ने कहा…

bahut sundar rachna .

राजभाषा हिंदी ने कहा…

रचना बहुत अच्छी लगी।

हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

स्‍वच्‍छंदतावाद और काव्‍य प्रयोजन , राजभाषा हिन्दी पर, पधारें

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सुंदर भाव, शानदार अभिव्यक्ति।
………….
जिनके आने से बढ़ गई रौनक..
...एक बार फिरसे आभार व्यक्त करता हूँ।

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

राधे-कृष्ण!

JHAROKHA ने कहा…

स्वर , रश्मियों में

उन्मत्त हूँ मैं

पद पंकज रेनु

बनी हुई हूँ ----------------------------------सुन्दर भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

sundar sashakt lekhan

misir ने कहा…

सुन्दर इस छंद नें भक्त मन छुआ है ,
जन्माष्टमी के प्रसाद का मीठा पुआ है!

Babli ने कहा…

बहुत सुन्दर और शानदार प्रस्तुती!
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

वीथिका ने कहा…

बहुत ही सुंदर छंद है समर्पण का भाव देखते ही बनता है .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

समर्पण की पराकाष्ठा ... बहुत सुंदर रचना...

वीना ने कहा…

सखि ! नेह की डोर से

हूँ बँधी मैं

मनमोहन रूप

सनी हुई हूँ ।

स्वर , रश्मियों में

उन्मत्त हूँ मैं

पद पंकज रेनु

बनी हुई हूँ ।


पावन-पवित्र प्रेम का सुंदर चित्रण...

Parul ने कहा…

bahut sundar1

ज्योति सिंह ने कहा…

behad sundar chhand .

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

पद पंकज रेनु बनी हुई हूँ ।
राधा की समर्पण भावना शब्द शब्द में झलक रही है । अति सुंदर ।

मिसिर ने कहा…

धन्य हैं आप,
भक्ति रस का सरस काव्य,
कृष्ण-वृक्ष की छाँव ,सघन ,
शीतल ,त्रि-ताप-हर ,...........
सुन्दर भाव.............

विख्यात मिश्रा(कवि व गीतकार ) ने कहा…

क्या कहने........!!!!!!!