रविवार, 4 जुलाई 2010

कानून ; मकड़ी का जाला

अपने देश मे कानून

मकड़ी का जाला है

जिसमे मक्खी फँस

जाती है

मच्छर फँस जाता है

झींगुर झन्नाता है ।

हाथी और घोड़ा

चीरता चला जाता है ।

37 टिप्‍पणियां:

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत सुन्दर, रचना!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच कहा..आम जनता तो मक्खी मच्छर ही है...

arvind ने कहा…

.......सच कहा,सुन्दर रचना!

ज्योत्स्ना पाण्डेय ने कहा…

वाह! बहुत खूब!

शुभकामनाएं...

kshama ने कहा…

Are baba,machhar aur makhi bhi nikal padte hain!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

kya kar sakte hain.......issi kanun ko jhelna hai........:)

ek saargarbhit rachna!

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

लोकतंत्र के इस स्तम्भ पर आपका सच्चा, बेबाक और नंगा बयान!!!

मनोज कुमार ने कहा…

हाथी-घोड़ों का ही ज़माना है।

ज्योति सिंह ने कहा…

aapki rachna har baar naye andaaz me hoti hai ,sundar

aaryan ने कहा…

जोरदार प्रहार

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भाई क्या बात है .. सच सौ फ़ि सदी सच ... बड़ी मछलियाँ आसानी से निकल जाती हैं ...

Deepak Shukla ने कहा…

Wah Arunesh bhai kya kahne..

Vywastha par chot karna aapki khubi hai..

Adweeteeya..

Deepak..

Tripat "Prerna" ने कहा…

bahut khoob!

http://sparkledaroma.blogspot.com/

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

सच में हमारी व्यवस्था एक मकडी का जाला ही बन गई है जिसमे इन्सान एक बार फंस जाये तो निकल ना मुश्किल है । सटीक कविता ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत ही सटीक!
--
वास्तविकता भी यही है!

mridula pradhan ने कहा…

bahut achchi lagi.

Rajendra Swarnkar ने कहा…

आदरणीय अरुणेश मिश्र जी
नमस्कार !
बहुत संतुलित रचना है !
व्यंग्य बिना दिशाहीन हुए सीधा प्रहार करता है ।
… और यही है कविता की सार्थकता !
साधुवाद !
मैं छंदसाधक - आराधक हूं , लेकिन आपकी यह रचना प्रभावित करती है ।
आपको भी शस्वरं पर विजिट का आमंत्रण है , आइएगा …
- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

हर्षिता ने कहा…

व्यवस्था पर करारा प्रहार करती सुन्दर रचना है।

dipayan ने कहा…

क्या बात । बहुत खूब ।

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

हाथी, घोडो में ही तो दम होता है सब कुछ तोड़ कर निकल जाने का.

तीखा कटाक्ष.

हिन्दी हाइकु ने कहा…

सच्ची बात कही है आप ने .....
कोई समझे तो जाने.....
मैने हिन्दी हाइकु बलॉग बनाया है....
कभी समय निकाल कर आना
लिंक है....
http://hindihaiku.wordpress.com
hindihaiku@gmail.com

हरदीप

Virendra Singh Chauhan ने कहा…

Sir .....Apke blog par aakar jo kushi milli hai use main shabdon main vayan nahin kar sakta.

Aapne Hathi aur Ghode ke nikalne ki baat kahi.Jis arth men aapne ye baat kahi hai, us se men sahmat hun.
apvaadon ko chhod den to hamare desh ke qaanun se koi bhi kabhi bhi bach nikal sakta hai , bas use qaanuni daavpechon samjh aaten hon.

Aapne saral shabdon men itni badi baat kah di...ye mere liye bahut hi inspiring hai.

Iske liye.. aapka dhanaybaad, sir.

शोभना चौरे ने कहा…

sshkt abhivykti

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

अपने देश मे कानून

मकड़ी का जाला है

जिसमे मक्खी फँस

जाती है

मच्छर फँस जाता है

झींगुर झन्नाता है ।

हाथी और घोड़ा

चीरता चला जाता है ..

वाह....बहुत खूब .....!!

ekal ने कहा…

सोचने का विषय है ... चोर तो चोरी ही करेगा चाहे राजा ही क्यों न बन जाये

Manoj Bharti ने कहा…

सटीक ... व्यंग्य ...बहुत खूब

दीर्घतमा ने कहा…

मकड़ी क़ा जला,
हाथी घोडा चिर फाड़ जाता है
सम सामयिक बहुत अच्छा.
धन्यवाद.

बेचैन आत्मा ने कहा…

वाह ! क्या खूब कहा आपने।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत सटीक बात कही इस रचना के माध्यम से.

Saumya ने कहा…

main stabdh hun aapki soch se...bauaht acchi hai

Vivek VK Jain ने कहा…

bahut sundar rachna....ise b padiye-

http://zealzen.blogspot.com/2010/07/blog-post.html

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

धारदार कटाक्ष।

डा. सुभाष राय ने कहा…

अरुणेश भाई, आप की रचनायें नावक के तीर की तरह होती हैं. देखने में हो सकता है, छोटी लगें, पर घाव गम्भीर करती हैं. अपनी मार रखें इसी तरह बरकरार. आप नुक्कड़ पर तरल की दो लाइनें देखकर उस पर टिप्पड़ी दे गये. उनकी गजलें साखी पर लगीं हैं. url है==========

www.sakhikabira.blogspot.com

neha ने कहा…

bahut badiya..

वीना ने कहा…

बहुत जबरदस्त व्यंग, सीधा प्रहार। समय मिले तो इसे भी देखिएगा।

http://veenakesur.blogspot.com/

वीना ने कहा…

बहुत जबरदस्त व्यंग, व्यवस्था पर सीधा प्रहार। समय मिले तो इसे भी जरूर देखिएगा।

http://veenakesur.blogspot.com/

Vijay Pratap Singh Rajput ने कहा…

बहुत सटीक!! सुन्दर!!