शनिवार, 29 मई 2010

आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर

अखरे जो बार बार

उसे अखबार

कहते हैं ।

सरके जो बार बार

उसे सरकार

कहते हैं ।

समाचारों को बेचकर

खरीद ले जो कार

उसे पत्रकार

कहते हैं ।

38 टिप्‍पणियां:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

वाह!

Deepak Shukla ने कहा…

Pratham to Patrkarita Divas ki badhai sweekaren..

Sahaj vyang aur behtareen prastuti..

DEEPAK..

कडुवासच ने कहा…

...बहुत खूब !!!

Smart Indian ने कहा…

लाजवाब परिभाषाएं!

Ra ने कहा…

सर ..आपका इस तरह की रचनाएँ लिखने में कोई तोड़ नहीं ...कम शब्दों में ...अच्छा सन्देश ! इसे ही गागर में सागर कहते है ..आपके लिए हमारे यहाँ भी कुछ है ,सुझाव दे

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सटीक और लाजवाब....

संजय @ मो सम कौन... ने कहा…

बहुत खूब जी,
देखन में छोटे लगे, भाव भरे गंभीर।

मनोज कुमार ने कहा…

लाजवाब प्रस्तुति जो कम शब्दों में ...अच्छा सन्देश दे रही है ! इसे ही गागर में सागर कहते है .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कम शब्दों में गहरी बात ... पत्रकारों की तो चाँदी है ...

शोभना चौरे ने कहा…

steek pribhashaye .

nilesh mathur ने कहा…

वाह! क्या खूब कही है! लाज़वाब!

Saumya ने कहा…

bauhat teekha vyanga hai...

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

बैंक वाले कष्ट से मरने वाले को कस्टमर कहते हैं... और बचपन में सुनते थे विद्या की अर्थी उठाने वाला विद्यार्थी होता है... आपने हमारे शब्द्कोश में वृद्धि कर दी... मज़ा आ गया!!

वीथिका ने कहा…

अतिसुँदर ...अतिव्य़ँगात्मक ...अतिसमीचीन रचना ..

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

समाचारों को बेचकर
खरीद ले जो कार
उसे पत्रकार
कहते हैं ।
...सही बात है ...आज के सत्य में यह भी जुड़ गया है.

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

अब हमे इन परिभाशाओ को आत्मसात कर लेना चाहिए. बधिया कताक्श.

Vishnukant Mishra ने कहा…

Bhai Arunesh...

dard ki jo baat ho sweekar kahte hai.
annyay pr prtighat ko upsanhar kahtey hai.
vedna ke sabd jo arunesh mn se hai nikaltey
sahity bhasa meyn ussey "jan pyar 'kahtey hain.

arvind ने कहा…

समाचारों को बेचकर

खरीद ले जो कार

उसे पत्रकार

कहते हैं । ......वाह!

अरुण 'मिसिर' ने कहा…

एक त्रिशूल छोड़ा है
आपने इन तीन पंक्तियोँ
के माध्यम से, जिसने
लक्ष्य को गहराई तक
भेदा है।

प्रदीप कांत ने कहा…

समाचारों को बेचकर
खरीद ले जो कार
उसे पत्रकार
कहते हैं ।

अच्छी परिभाषा

Arvind Mishra ने कहा…

वाह क्या कहने !

आचार्य उदय ने कहा…

क्रोध पर नियंत्रण स्वभाविक व्यवहार से ही संभव है जो साधना से कम नहीं है।

आइये क्रोध को शांत करने का उपाय अपनायें !

Shabad shabad ने कहा…

गहरी बात ...गागर में सागर... लाज़वाब!
क्या बात कही है....

समाचारों को बेचकर

खरीद ले जो कार

उसे पत्रकार

कहते हैं ।

Himanshu Mohan ने कहा…

बढ़िया लगा। धारदार सोच और तनी हुई अभिव्यक्ति।

स्वाति ने कहा…

वाह!वाह..
क्या खूब .. लाज़वाब

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

simply great.......itni adbhut baat kahi kaise???:)

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

hamare blog pe aayen!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

सत्य को परिभाषित करती सुन्दर रचना!

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

बहुत ख़ूब...

shikha varshney ने कहा…

वाह सटीक व्यंग .

Urmi ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया! लाजवाब!

Prem Farukhabadi ने कहा…

बहुत सही कहा अपने इसे भी देखें और बताएं जुड़ने लायक है कि नहीं।

अपने और गैरों के भावों को
खूबियों से पद्य में पिरोदे
उसे पद्यकार कहते हैं।

Asha Joglekar ने कहा…

क्या बात है । अपनी बात से सरके जो बार बार
उसे सरकार कहते हैं । बूंद से सागर बरना तो कोई आपसे सीखे ।

आचार्य उदय ने कहा…

आईये जानें ..... मन ही मंदिर है !

आचार्य जी

ज्योति सिंह ने कहा…

laazwaab ,bahut hi jordaar rahi ,bahar rahi ek mahine se is karan aane me der ho gayi ,badhai .

आचार्य उदय ने कहा…

आईये जानें .... मैं कौन हूं!

आचार्य जी

Mithilesh dubey ने कहा…

क्या बात, शब्द कम परन्तु गंभीर।

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

bahut sunder rachna arunesh ji gambhir shabd ...........